तमिलनाडू

RTI एक्ट से बाहर करने का फैसला वापस लॉ एंड ऑर्डर विभाग को नहीं मिलेगी छूट

Ratna Netam
27 Sept 2026 5:43 PM IST
RTI एक्ट से बाहर करने का फैसला वापस लॉ एंड ऑर्डर विभाग को नहीं मिलेगी छूट
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चेन्नई। तमिलनाडु सरकार ने पब्लिक (लॉ एंड ऑर्डर) डिपार्टमेंट को सूचना का अधिकार (RTI) एक्ट से छूट देने वाला अपना नोटिफिकेशन कुछ ही घंटों बाद वापस ले लिया। सरकार की ओर से जारी शुरुआती आदेश में इस विभाग को 'इंटेलिजेंस और सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशन' की श्रेणी में शामिल किया गया था, जिसके बाद इसे लेकर सवाल उठने लगे थे।जानकारी के मुताबिक, तमिलनाडु रकार ने एक नोटिफिकेशन जारी कर पब्लिक (लॉ एंड ऑर्डर) डिपार्टमेंट को RTI एक्ट के दायरे से बाहर रखने का फैसला किया था। इस आदेश के बाद इस विभाग से जुड़ी कई जानकारियों को सूचना के अधिकार के तहत हासिल करना मुश्किल हो सकता था।
शुरुआती आदेश में विभाग को 'इंटेलिजेंस और सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशन' की श्रेणी में रखा गया था। इस श्रेणी में आने वाले संगठनों को RTI एक्ट के तहत कुछ विशेष छूट प्राप्त होती है। हालांकि, भ्रष्टाचार और मानवाधिकार उल्लंघन से जुड़े मामलों में जानकारी उपलब्ध कराने के प्रावधान बने रहते हैं।सरकार के इस फैसले के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर विरोध शुरू हो गया। आलोचकों ने सवाल उठाया कि कानून-व्यवस्था से जुड़े विभाग को RTI से छूट देने का क्या आधार है और इससे पारदर्शिता पर क्या असर पड़ेगा।विरोध बढ़ने के बाद तमिलनाडु सरकार ने अपने इस फैसले को वापस लेने का निर्णय लिया। कुछ ही घंटों के भीतर जारी नोटिफिकेशन को रद्द कर दिया गया। सरकार की ओर से इस कदम के बाद पब्लिक (लॉ एंड ऑर्डर) डिपार्टमेंट पहले की तरह RTI कानून के तहत जानकारी देने की प्रक्रिया में बना रहेगा।
इस मामले में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर हुई कि कानून-व्यवस्था विभाग के कामकाज से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां RTI के माध्यम से आम लोगों तक पहुंचती रही हैं। इनमें सांप्रदायिक घटनाओं, राजनीतिक आंदोलनों, पुलिस हिरासत में हुई मौतों और अन्य कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों से संबंधित सूचनाएं शामिल हैं।RTI एक्ट का उद्देश्य सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है। इसके तहत नागरिकों को सरकारी विभागों से संबंधित सूचनाएं मांगने का अधिकार दिया गया है। हालांकि, सुरक्षा और खुफिया संगठनों को कुछ परिस्थितियों में इस कानून से छूट दी गई है।
तमिलनाडु सरकार के शुरुआती आदेश में पब्लिक (लॉ एंड ऑर्डर) डिपार्टमेंट को इसी श्रेणी में रखने की बात सामने आई थी। इसके बाद इस फैसले को लेकर बहस शुरू हो गई कि क्या कानून-व्यवस्था विभाग को सुरक्षा संगठन के समान माना जा सकता है।विरोध करने वालों का कहना था कि कानून-व्यवस्था से जुड़े विभाग के कामकाज में पारदर्शिता जरूरी है, क्योंकि इसके फैसलों का सीधा असर आम नागरिकों पर पड़ता है। पुलिस कार्रवाई, सार्वजनिक सुरक्षा और प्रशासनिक फैसलों से जुड़े कई मुद्दों पर लोगों को जानकारी की जरूरत होती है।
विवाद बढ़ने के बाद सरकार ने तेजी से कदम उठाते हुए नोटिफिकेशन वापस ले लिया। इस फैसले के बाद RTI के तहत जानकारी प्राप्त करने की व्यवस्था पहले की तरह जारी रहने की उम्मीद है।इस पूरे घटनाक्रम ने सरकारी विभागों को RTI कानून के दायरे में रखने और पारदर्शिता के मुद्दे को फिर से चर्चा में ला दिया है। कानून विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों की ओर से भी ऐसे फैसलों को लेकर समय-समय पर सवाल उठाए जाते रहे हैं।
RTI एक्ट के तहत आने वाली सूचनाएं सरकारी फैसलों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को समझने में नागरिकों की मदद करती हैं। खासकर कानून-व्यवस्था जैसे विषयों में पारदर्शिता को महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि ये सीधे तौर पर जनता की सुरक्षा और अधिकारों से जुड़े होते हैं।तमिलनाडु सरकार के इस फैसले को वापस लेने के बाद अब यह साफ हो गया है कि पब्लिक (लॉ एंड ऑर्डर) डिपार्टमेंट को RTI से छूट देने वाला आदेश लागू नहीं रहेगा। सरकार ने विरोध के बाद कुछ ही समय में अपने कदम को बदल दिया।
इस मामले में सरकार की ओर से जारी शुरुआती नोटिफिकेशन और बाद में उसकी वापसी दोनों ही चर्चा का विषय बने। जहां पहले आदेश के जरिए विभाग को विशेष श्रेणी में रखने की कोशिश की गई थी, वहीं विरोध के बाद उसे वापस लेकर पुरानी व्यवस्था बहाल कर दी गई।कुल मिलाकर तमिलनाडु सरकार ने पब्लिक (लॉ एंड ऑर्डर) डिपार्टमेंट को RTI एक्ट से छूट देने वाला नोटिफिकेशन जारी करने के बाद वापस ले लिया। विरोध के बाद सरकार ने यह कदम उठाया। अब कानून-व्यवस्था, पुलिस कार्रवाई और अन्य संबंधित मामलों से जुड़ी जानकारी RTI प्रक्रिया के तहत मांगी जा सकेगी।
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